Thursday, March 20, 2025

Hamare Beech.......,

वो आई थी पास मेरे 
चंद लम्हें थी साथ मेरे 
हाथों में थे हाथ पड़े  
चुड़ियों में थे जज़्बात सजे,
💑
ख़ामोश सज रहे थे लट 
खुल न रहे थे लब 
जैसे बंधे पड़े थे सारे शब्द,
👫
क्या ऐसा भी हो सकता है 
लबों के साथ - साथ 
शब्द भी सुख सकता है,
👨👩
गुमसुम चुपचाप सी 
ऐसी तो न थी पहले खुशी,
👩
जब तक तेरे संग रहा  
नासमझ बन दर्द में भी सर्द रहा,
💕💕   
पल रही पहलू में जो ख़ामोशी है
किसे कहूँ कौन इसका दोषी है,
💗💗  
आँखें है ये तेरी या आईना   
फितरत साफ - साफ झलकते है 
इनके भी होते अपने करिश्में 
सूरज में भी दीखते आज धब्बे है,
👫
होके भी आज तू संग नही  
हाथ तो है पर साथ नही,
लगता है बुत बनने की आई आज अर्ज़ी है 
और बनके काफ़िर कहते है ख़ुदा की मर्ज़ी है !! 
💔💔💔💔   

Saturday, November 16, 2024

Jaa...Rahi Thi Mein

कितना अलबेला है संसार.......,  

उबड़ खाबड़ पगडण्डियाँ  

शरद से सुखी पड़ी है सारी डंडियाँ,

लो हो गई नए रुत की शुरूवात    

लगने लगी फिर ओसों की कतार !! 

नख सिकोड़ती, हर कदम से जमीं को टटोलती,

अक्स को अपने बूँदों में कहीं तलाशती  देखे  

जा रही थी मैं..........,  

आसमां के नीचे, नन्हीं किरणों से बचते

खुद को आँचल में जमीं के सिमटते देखे 

जा रही थी मैं............,

ये सोंधी मिट्टी की खुश्बू , जिसमें इत्र सा जादू

धीरे धीरे ही सही, अपने नसों में घुलते इसे देखे 

जा रही थी मैं............, 

आँखें खोलूँ या बंद रखूँ या और थोड़ा सब्र रखूँ 

इस बगियाँ में आज भी, खुदको ही अकेला देखे

जा रही थी मैं............., 

लगा हर तरफ है होड़, था मगर ये जज़्बातों का शोर

चाहा बहुत रहूँ बेअसर, फिर भी आ जाते है नज़र ये देखे

जा रही थी मैं.............,  

मिली फुर्सत न मुझे मेरे भँवर से, न जाने कब से इनसे घिरी हूँ, 

साल दर साल परत दर परत, सीलन सी इनमें पड़ी खुद को देखे  

जा रही थी मैं.............,   

💝💝💝

Saturday, July 22, 2023

Jadoo.....

 ऐसा लगता है आजकल.......,                      
                           .......  हम थोड़ा ज्यादा फ़िक्र में रहते है ! 

चलते चलते राहों में अकसर,कदम भी हिचकोले लेते है !!

सुनी राहों में भी अब, कहाँ हम अकेले होते है !!!

👫💖👫

अनसुनी हर आहट भी, अब तेरे आने का जिक्र करती है !

आते - जाते हर निशां को ये, बड़े गौर से देखा करती है !!

झिलमिल ही सही पर इन में, तेरे साथ का वो नज़ारा है !!!

💕💑💕

जो ढलती हर शाम हमने साथ, खुली आँखों से निहारा है !

उन तन्हाँ रातों की बात क्या करुँ, बात पुरानी सी लगती है !!
  
आज तो हर कली कहती कहानी, अपनी सी लगती है !!!

💓👌💗

जुगनुँओं से सजी ये रात, जिसमें तारे भी चमकते है !

दिया बाती है दुल्हा दुलहन आज,तो पतंगें बाराती से लगते है !!

क्या इन्हें तुमने, जमीं से पहले मेरी आँखों में उतारा है !! 

संग मेरे रहे तू ,तेरी फिक्र में मैं,
 
और कुछ न मिले इस जहाँ से.........आज से ये भी गवारा है !!! 

 💝💞💝  
 

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